*दीपावली में रोशन हुआ सरायकेला, पूजे गए माता काली*
*दीपक कुमार दारोघा*
सरायकेला: विविधता में एकता का प्रतीक दीपावली में जिला मुख्यालय सरायकेला भी रहा रोशन।
शाम ढलते ही घर आंगन पर सजने लगे दीये। अमावस्या की रात दीयों की रोशनी से जगमगाने लगा। दीपावली ने स्वच्छता को भी प्रोत्साहित किया। पिछले एक सप्ताह से लोग घर आंगन का साफ सफाई में जुटे थे। और आज दीपावली मनाई। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष वनवास एवं लंकापति रावण का वध करने के बाद अपनी पत्नी सीता एवं भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। इसी खुशी में दीपावली मनाया जाता है।
द्वापर युग में इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर के का वध कर 16000 कन्याओं को उसके कैद से मुक्त कराया था। दक्षिण भारत में इसके लिए भी खुशी मनाया जाता है। अलग-अलग काल में हुई घटना का जिक्र में यह मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान धन समृद्धि की देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थी। इसलिए इस दिन प्रत्येक सेठ साहूकार माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं।
इसी दिन शक्ति स्वरूपा माता काली ने रक्तबीज का संहार कर संसार में नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का प्रकाश फैलाया था। दीपावली में जहां चारों ओर पटाखे की आवाज गूंजता रहा। वहीं दीयों एवं जगमग लाइटों की रोशनी अंधकार से प्रकाश की ओर चलने का संदेश दे रहा था। लोग एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दे रहे थे। वहीं सेठ साहूकार अपने-अपने प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी के पूजन में सक्रिय दिखे। भक्त श्रद्धालुओं का रुख मंदिर की ओर रहा। पुराना बस स्टैंड स्थित मंदिर में सरकारी प्रयास से आयोजित काली पूजा उत्सव में भी लोग पहुंचे। माता काली की पूजा अर्चना की।
वहीं राजा राजवाड़ समय में बनी गुदड़ी बाजार स्थित काली मंदिर में भी भक्त श्रद्धालुओं का भीड़ रही।
यहां तक कि खरकाई नदी तट पर स्थित पर्यटनीय स्थल श्मशान काली मंदिर में भी भक्त श्रद्धालु पहुंचे।




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