नहीं रहे शिक्षक रंजन कुमार पटनायक


*सरायकेला: शिक्षक रंजन की निधन के बाद लोगों ने उनके हुनर को किया सलाम, श्रद्धांजलि सभा कर उनके कृतित्व को किया याद*

*दीपक कुमार दारोघा*

सरायकेला: जिला मुख्यालय सरायकेला के पटनायक टोला निवासी एक शिक्षक रंजन कुमार पटनायक की निधन के बाद लोगों ने उनके हुनर को किया सलाम और उत्कलमणि आदर्श पाठागार में श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर उनके कृतित्व को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने बताया कि रंजन कुमार पटनायक जीवन में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दी है। वह उत्क्रमित उच्च विद्यालय केंदुआ के प्राचार्य भी रहे और वर्ष 2011 में सेवानिवृत हुए। वह सार्वजनिक जीवन में एक रंगकर्मी, प्रसिद्ध छऊ नर्तक एवं एक फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में भी याद किए गए। सरायकेला के प्रसिद्ध अधिवक्ता दिवंगत हेमेंद्र पटनायक के पुत्र रंजन कुमार पटनायक का जन्म 3 जनवरी 1953 को हुआ था। वह बचपन से खेल,छऊ कला के प्रति रुचि रखते थे। सरायकेला फुटबॉल मैदान (एसएफसी) में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन का छाप छोड़ी है। वह छऊ के प्रसिद्ध कलाकार भी रहे। रूस में 1986 में आयोजित फेस्टिवल ऑफ इंडिया में उन्होंने सरायकेला छऊ कला के माध्यम से भारतीय कला संस्कृति का बखान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने छऊ कला के अलावे रंगमंच में ओड़िया नाटक मंचन करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दी है। अपने अभिनय एवं छऊ कला के माध्यम से उन्होंने सरायकेला के सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध करने में योगदान दिया है। उनका 3 अक्टूबर को निधन हुआ। श्रद्धांजलि सभा में कलाकार, खेल प्रेमी और कला प्रेमियों ने दिवंगत रंजन कुमार पटनायक के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित की एवं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा में पाठागार के सचिव एवं अधिवक्ता जलेश कवि, उपाध्यक्ष सुदीप पटनायक, संगीत नाटक अकादमी अवार्डी सुशांत महापात्र, चंद्रशेखर कर, चिरंजीवी महापात्र, काशी कर, भोला महांती, हलधर दास, राजेश महांती, चक्र महांती, पवन कवि सहित शिक्षा, कला, खेल से जुड़े लोग भी उपस्थित थे।

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