*सरायकेला: प्रकृति भी शक्तिरुपिणी की आगमन का करा रहा एहसास*
*दीपक कुमार दारोघा*
सरायकेला: शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ होते ही सरायकेला क्षेत्र में प्रकृति भी शक्ति रुपिणी (माता दुर्गा) की आगमन का एहसास करा रहा है।
खरकाई नदी किनारे आसपास क्षेत्र में काश के फूल यह संकेत देते हैं कि मां दुर्गा का पावन पर्व आ गया है।
महाकवि कालिदास ने ऋतुसंहार में काश फूल को शरद ऋतु रूपि नई दुल्हन के सफेद वस्त्र के रूप में दर्शाया है। कवि रवींद्र नाथ टैगोर ने इसे उल्लास का प्रतीक माना है। जानकारी के मुताबिक शक्ति रूपिणी दुर्गा का आगमन हाथी की सवारी में हो रहा है। जितिया से शक्ति रुपिणी की आवाह्न सरायकेला पैलेस में माता पाउड़ी की 16 पूजा से शुरू हो चुकी है। रविवार को खरकाई नदी तट पर स्थित शक्ति पीठों में भी पूजा अर्चना के साथ शारदीय नवरात्र शुभारंभ हुई। माता के भक्तों ने उपासना पूर्वक नवरात्रि व्रत रखा। अपने घर में घट स्थापना की एवं माता शैलपुत्री की पूजा अर्चना कर शक्ति रुपिणी का आवाह्न किया।
मान्यता है की शैल का अर्थ पर्वत है और पुत्री का अर्थ बेटी। पर्वत राज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इन्हें पार्वती सती के रूप में भी जाना जाता है। शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप है। इनकी पूजा अर्चना के साथ शक्ति रूपिणी की आवाह्न शुरू हो चुका है। अब लोग गर्मी उमस से राहत महसूस कर रहे हैं। शरद ऋतु के आगमन से प्रकृति भी शक्ति का एहसास करा रहा है।

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