*देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चिर निद्रा में लीन, एक महीना तक भोले बाबा होंगे जगत के पालनहार*
*दीपक कुमार दारोघा*
सरायकेला: आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी के बाद एक महीना तक जगत का पालनहार होंगे भोले बाबा। शिव मंदिरों में गूंजेगी हर हर महादेव की नारा।
जानकारी के मुताबिक प्रभु जगन्नाथ की बाहुड़ा रथ यात्रा के दौरान भक्त श्रद्धालुओं ने देवशयनी एकादशी उपासना पूर्वक पालन किया। खासकर विधवा महिलाएं भी जगत के पालनहार भगवान विष्णु के शरण में जाने के लिए इस तिथि का उपासना पूर्वक पालन करते हैं। मान्यता है कि प्रभु जगन्नाथ अपने भाई बहन के साथ श्री मंदिर पहुंचते ही माता लक्ष्मी इनका स्वागत करते हैं। इसके बाद श्री जगन्नाथ रूपी विष्णु माता लक्ष्मी के साथ क्षीर सागर में चार मास योग निद्रा में चले जाते हैं। इस चातुर्मास को मानव क्या पशु पक्षी भी पालन करते हैं। बगुला मछली खाना छोड़ देता है। चातुर्मास आत्मसंयम तप, व्रत,जप और आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ काल है। इस अवधि में भगवान विष्णु की आराधना,दान,पुण्य, सात्विक जीवन शैली पर भी बल दिया जाता है। जगत के पालनहार भगवान विष्णु के चार महीना योग निद्रा के कारण जगत पालन का दायित्व शिव शक्ति पर रहता है। भगवान शिव एक महीना तक दायित्व निभाते हैं। इसके बाद श्री गणेश सप्ताह भर तक दायित्व निभाते हैं। इसके बाद शक्ति रुपिणी भी दायित्व का निर्वाह करते हैं। जगत के पालनहार भगवान विष्णु देवोत्थान एकादशी में जागने के बाद ही पक्षी बगुला भी अपना व्रत तोड़ते है।

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