*ओड़िशा के तारकोशी डिजाइन हो या फिर झारखंड के कुचाई तसर सिल्क, खो रहा अस्मिता*
*दीपक कुमार दारोघा*
सरायकेला: ओड़िशा कटक के तारकोशी डिजाइन हो या फिर झारखंड के कुचाई तसर सिल्क प्रचार के अभाव में लोगों के नजर में परिचय खोता जा रहा है।
ओड़िशा के लोग तो तारकोशी डिजाइन को ओड़िशा की अस्मिता बताते हैं। यह तर्कोसी डिजाइन आर्नामेंट या साड़ी में किया जाता है। ओड़िशा की इस कलाकारी पहचान को आगे बढ़ाने की समय की मांग है। पिछले चुनाव(वर्ष 2024) में ओड़िशा में भाजपा ने ओड़िशा अस्मिता की बात जोर-सोर से उठाया था। भाजपा सत्ता में भी आई। ओड़िशा के मुख्यमंत्री बने मोहन चरण माझी। दो वर्ष गुजर जाने के बाद भी इस आर्थिक सांस्कृतिक विकास में तारकोशी डिजाइन राह ताक रहा है। कभी उत्कल गौरव मधुसूदन दास ने ओड़िया भाषा संस्कृति, आर्थिक विकास की दिशा में ताकोशी काम को प्राथमिकता दी थी। और लोगों को हुनर देने का प्रयास किया था।
ओड़िशा से सटे झारखंड राज्य में भी कुचाई तसर सिल्क को काफी उत्कृष्ट माना जाता है। भाजपा गठबंधन में बनी सरकार में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कुचाई सिल्क को देश-विदेश में फैलाने की दिशा में पहल की थी। वर्तमान झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन में बनी सरकार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा इस कुचाई सिल्क को ओर अधिक प्रोत्साहित करना एक अच्छी पहल हो सकती है।

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