अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस

 

 *अनाज की थाली में है मजदूरों का हक, सरायकेला में दिखा सफाई कर्मी श्रमिकों को सम्मानित करने की झलक*

 *दीपक कुमार दारोघा* 

सरायकेला: अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस में सरायकेला नगर पंचायत कार्यालय परिसर में दिखा सफाई कर्मी श्रमिकों को सम्मानित करने की झलक।

नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने सफाई कर्मी श्रमिकों को चंदन एवं तिलक लगाकर सम्मानित किया। सफाई कर्मी श्रमिकों पर उन्होंने पुष्प वर्षा भी की।

बताते चलें कि 1886 में अमेरिका में 8 घंटे काम 8 घंटे आराम 8 घंटे मनोरंजन की मांग को लेकर मजदूर आंदोलन छिड़ा था। अनेकों मजदूरों ने इसमें बलिदान दी। इस घटना के बाद 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में तय हुआ हर साल 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाएगा। उस समय भारत में अंग्रेज शासन में भी भारतीय मजदूरों का शोषण हो रहा था। मजदूरों ने आवाज उठाई एवं 1920 में ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस बना। जानकारी के मुताबिक लेबर पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा मद्रास (चेन्नई) में 1923 में पहली बार 1 मई को मजदूर दिवस मनाया गया था। देश स्वाधीन के बाद गणतंत्र भारत में संविधान के तहत मजदूरों का ध्यान रखा गया। मजदूरों की हित में न्यूनतम मजदूर कानून 1948, औद्योगिक विवाद कानून 1947, पीएफ कानून 1952 बना। इसके बावजूद असंगठित मजदूर बड़ी संख्या में समस्या से जूझ रहे हैं। खेत खलियान से लेकर औद्योगिक, रोड रास्ता में काम करने वाले तथा शिल्पकार, मूर्तिकार, फ्रीलांसर,डिलीवरी बॉय आदि दो जुन की रोटी के लिए परिश्रम तो करते हैं पर पारिवारिक जरूरत पूरा करने में पीछे हैं। ऐसे गरीबों के लिए सरकार प्रत्येक व्यक्ति को प्रति महीने 5 किलो चावल पीडीएस के जरिए उपलब्ध करा रही है। सूत्रों के मुताबिक इन दिनों पीडीएस (जन वितरण प्रणाली) से मिलने वाली चावल में विशेष प्रकार के सफेद चावल की मिलावट देखने को मिल रहा है। इस विशेष प्रकार के सफेद चावल को गर्म करने पर वह पिघल कर जलने लगती है।

 ऐसे चावल मिल से गोदाम एवं गोदाम से पीडीएस के जरिए गरीबों तक पहुंचती है। असंगठित मजदूरों को सही अनाज मिले यह समय की मांग है। मजदूर सशक्त होंगे तो देश सशक्त होगा। अनाज की थाली में भी है मजदूरों का हक।

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