पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र सरायकेला-खरसावां
दीपक कुमार दारोघा
सरायकेला खरसावां जिला पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। पर्यटकों के लिए यह छऊधाम है। मनमोहक यहां की नृत्य शैली से बरबस खींचे चले आते हैं। छऊ के अलावे यहां आए पर्यटक यहां मनोरम स्थलों का भी भ्रमण कर आनंद उठाते हैं।
यहां की प्राचीन गौरवमय मंदिरों में भी उत्कृष्ट कला की झलक मिलती है। सरायकेला का जगन्नाथ मंदिर उत्कृष्ट कला का नमूना पेश करता है। खरकाई नदी के तट पर अवस्थित यह मंदिर पर्यटक व शोधकर्ता के लिए आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावे माजणा घाट स्थित पंचमुखी शिव मंदिर भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। फिल्म खवेइया की शूटिंग भी यहां हुई है। खरकाई नदी में नौका विहार पर्यटकों को लुभाता है। नदी के गर्भ में स्थित भूरसापाट देवी स्थान प्राकृतिक छटाओं से परिपूर्ण है। पर्यटक नौका से यहां पहुंचते हैं और भूरसापाट स्थान के निकट स्थित गंगादेवी के मंदिर का भी दर्शन करते हैं। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद उठाते हैं। खरकाई नदी में कुदरसाई के पास "मीर्गी चिंगडा"खुशनुमा स्थान है। मकर संक्रांति के बाद पहले शनिवार को यहां केवल महिलाओं के लिए मेला का आयोजन होता है। प्राकृतिक मनमोहक स्थानों में मीर्गी चिंगडा अद्वितीय है। खरकाई नदी के तट पर ऐसे कई खुशनुमा जगह है जहां मनुष्य प्रकृति की गोद में अपूर्ण आनंद की अनुभूति करता है। यह स्थान अद्वितीय पिकनिक स्पॉट भी है। खरकाई नदी के तट पर ही प्राचीन भैरव पीठ स्थली है। यह छऊ का प्राचीन आखड़ा के रूप में भी जाना जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण इस स्थल में भी पर्यटक पहुंचते हैं एवं छऊ नृत्य की उत्पत्ति के रहस्य को जानने की कोशिश करते हैं।
इसके अलावे यहां सरायकेला पैलेस,राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र सहित ओर भी कई मनोरम स्थल है।
इसके अलावे जिला मुख्यालय सरायकेला से करीब 12 किलोमीटर उत्तर पश्चिमी सीमा पर खरसावां प्रखंड के आकर्षणी पहाड़ है। यह आकर्षणी देवी स्थान है। आस्था का प्रतीक यह देवी स्थान मानो प्रकृति द्वारा दुल्हन की तरह सजाया गया है। इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकारी पहल भी हुई है।
आकर्षणी देवी स्थान से पश्चिम करीब 6 किलोमीटर दूरी पर ऐतिहासिक खरसावां शहीद स्थल अवस्थित है। 1 जनवरी 1948 को हुई हृदय विदारक घटनाओं का याद दिलाता यह शहीद स्थल समय के साथ-साथ झारखंड राज्य निर्माण का प्रतीक स्थल बन गया है। 1 जनवरी को इस शहीद स्थल पर झारखंड के मुख्यमंत्री के अलावे विपक्ष के नेता भी शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। यह ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों व शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है।
यहां से हटकर उत्तर पूर्व की ओर चांडिल अनुमंडल के प्राकृतिक सौंदर्य की बात ही निराली है। जिला मुख्यालय सरायकेला से करीब 55 किलोमीटर दूर उत्तर चांडिल में दलमा अभ्यारण है। चौका मोड से करीब 21 किलोमीटर पूर्व उत्तर सीमा में अवस्थित दलमा अभ्यारण मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। अभ्यारण में मृग या हिरण का मनमोहक दृश्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। पहाड़ों की गोद में स्थित जलाशय में हाथियों का झुंडों का मनोरम दृश्य पर्यटकों को बहुत लुभाते हैं। तथा आगंतूक पर्यटकों को आकर्षित करता है।
चांडिल अनुमंडल में ही नेशनल हाईवे 33 पर चौका मोड़ से करीब 7 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण सीमा पर अवस्थित पालना डेम है। करीब आठ छोटे-बड़े पहाड़ों से घिरा यह पालना डेम आगंतुक पर्यटकों को अनायास ही आकर्षित कर लेता है। इसके अलावे पातकुम संग्रहालय और चांडिल डेम भी पर्यटकों को आकर्षित करता है।
जिला के राजनगर प्रखंड अंतर्गत पुरातत्व से संबंधित स्थान मूर्तिकोचा (इटापोखर) है। पुराने जुमाल ग्राम पंचायत के जामबनी गांव से करीब 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित मूर्तिकोचा यादगार स्थानों में से है। बताया जाता है यहां पुरातत्व विभाग द्वारा किए गए खनन से कई तरह की मूर्ति प्राप्त हुई थी। तब से प्राकृतिक छटाओं से भरा इस क्षेत्र को मूर्तिकोचा भी कहा जाता है। यह भी बताया जाता है कि पुरातत्व विभाग द्वारा जिस स्थान पर खनन किया गया था वह राजा किचक का गढ़ था।
इसी प्रखंड में ही बानाटांगरानी के पास बगवोंगा नदी तट पर भीमखोंदा पर्यटनीय स्थल है। भीमखोंदा और मूर्तिकोचा (किचक का किला) महाभारत के पांडवों का अज्ञातवास अंश की याद दिलाती है।
जिला में गम्हरिया प्रखंड के सीतारामपुर डैम एवं आदित्यपुर में एशिया के प्रसिद्ध औद्योगिक क्षेत्र हैं। कुचाई प्रखंड उत्कृष्ट कुकुन उत्पादन के लिए मशहूर है। इस जिला में कृषि,उद्योग,कला संस्कृति व पर्यटन का अपूर्व संगम है।
बस जरूरत है पारखी नजर की और इसे पर्यटन के रूप में विकसित करने की। ऐसा करने से पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। सरकार को तो राजस्व प्राप्त होगा ही साथ ही लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।







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