उत्कल गौरव मधुसूदन दास जयंती


 *जयंती पर सरायकेला में याद किए गए उत्कल गौरव मधुसूदन दास*

 *दीपक कुमार दारोघा* 

सरायकेला: उत्कल गौरव मधुसूदन दास की जयंती के अवसर पर सरायकेला हंसाहूड़ी स्थित सिस्टर निवेदिता इंग्लिश मीडियम स्कूल में कार्यक्रम हुई जिसमें अतिथि, शिक्षक शिक्षिकाओं ने उनके कृतित्व को याद किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ अतुल सरदार ने कहा कि उत्कल (ओड़िशा) प्रदेश गठन में मधुसूदन दास की महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने उत्कल गौरव मधुसूदन दास की जीवनी पर प्रकाश डाला और कहा कि वह जन नायक, एक बैरिस्टर,एक कवि के रूप में भी परिचित थे। उन्होंने उत्कल का विकास के लिए उत्कल सम्मेलन का गठन किया था। ओड़िया जाति का शैक्षिक, सांस्कृतिक,आर्थिक विकास के लिए नई जागरूकता लाए थे। उनके कृतित्व से प्रेरणा लेने की दिन है। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्कल गौरव मधुसूदन दास द्वारा रचित ओड़िया कविता उत्कल संतान से हुई। "तू परा बलाउ उत्कल संतान,तेबे किम्पा तुही भिरू। तोहर जननी रोदन करिले,कहिबाकु किम्पा डोरू।"उक्त कविता का जिक्र करते हुए पत्रकार दीपक कुमार दारोघा ने कहा कि उत्कल गौरव मधुसूदन दास की मातृ भूमि के प्रति भक्ति यह इजहार करता है कि सदैव मातृभूमि की रक्षा के प्रति जागरूक रहें।

 उनका जन्म ओड़िशा कटक जिला के सत्यभामापुर में 28 अप्रैल 1848 को हुआ था। ओडिया भाषा संस्कृति शैक्षिक आर्थिक विकास के प्रति महत्वपूर्ण योगदान दी है। उन्होंने उत्कल सम्मेलनी का गठन किया था। उनके देहांत के बाद उत्कल सम्मेलनी, उत्कल गौरव मधुसूदन दास विचार मंच ओड़िया भाषा संस्कृति की विकास के दिशा में सक्रिय है। उत्कल कुल वृद्ध मधु बाबू की कृतित्व को लोग आज भी याद कर रहे हैं। उनके कृतित्व से प्रेरणा लेने का दिन है।

मौके में आए अतिथि, शिक्षक-शिक्षिका, छात्र-छात्राओं ने उत्कल गौरव मधुसूदन दास के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

कार्यक्रम में शिक्षक प्रसुन रथ, शंभू सामड़, शिक्षिका मिता कवि,दीपीका सहित शिक्षक शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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