*राजकीय चैत्र पर्व में दिखा प्रसिद्ध सरायकेला छऊ की झलक*
*दीपक कुमार दारोघा*
सरायकेला: पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग झारखंड सरकार के तत्वावधान में जिला प्रशासन एवं राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र द्वारा 11 से 13 तक आयोजित राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव के समापन समारोह में बिरसा मुंडा स्टेडियम स्थित रंगमंच में दिखा प्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्य की झलक।
यहां रात भर दर्शक छऊ नृत्य का आनंद लेने में मशगूल दिखे। विभिन्न प्रांत के लोग भी यहां छऊ नृत्य देखने पहुंचे थे। स्टेडियम में असंख्य भीड़ रही। इससे पहले उद्घाटन सत्र में अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि प्रसिद्ध सरायकेला छऊ केवल नृत्य नहीं सांस्कृतिक पहचान है। आने वाले पीढ़ी को समृद्ध परंपरा से परिचित करवाता है। आधुनिक युवाओं में परंपरा पीछे छूट रहा है। उन्होंने कहा कि सरायकेला छऊ को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इसे बचाकर रखना हमारा कर्तव्य है। सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक पदाधिकारी, पत्रकार,कलाकार, दर्शकों की मौजूदगी रही। रंगमंच में भूमि पूजन,यात्राघट मांगलिक संगीत के बाद रंगमंच में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला से जुड़े कलाकारों ने हरे विष्णु प्रस्तुति की। मेघदूत नृत्य भी देखने को मिला। इस दौरान मंच में कलाकार, कलादलों, मीडिया से जुड़े पत्रकार प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया।
एसपी मुकेश लुणायत,एडीसी जयवर्धन,अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश के कर कमलों से सम्मानित किया गया। आयोजन समिति के सदस्यों की भी उपस्थिति रही। केदार आर्ट सेंटर, के के करूवा छऊ नृत्य दल के अलावे सरायकेला छऊ नृत्य प्रतियोगिता में शामिल ग्रामीण टीम, प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त कलादलों ने भी मंच में अपनी प्रस्तुति दी एवं दर्शकों की वाहवाही बटोरी। दर्शक यहां मेला का भी आनंद लेने में सक्रिय दिखे।
यहां नृत्य का आनंद लेने के साथ-साथ लोग पैलेस की ओर भी रुख करते दिखे। सरायकेला पैलेस में भी श्री कलापीठ द्वारा चैत्र पर्व (छऊ उत्सव)आयोजन किया गया था।
राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव के नेतृत्व में यहां पिछले 11 अप्रैल से सरायकेला छऊ नृत्य का कार्यक्रम जारी था। समापन समारोह में 13 अप्रैल को विधायक सरयू राय पहुंचे एवं प्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्य का आनंद उठाया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्षों से परंपरा अनुसार जो उत्सव मनाते आ रहे हैंवह। परंपरा जीवित रहे। संस्कृति संरक्षित रहे। इस मुद्दे को विधानसभा में ज़रूर उठाया जाएगा।
यहां भी रात भर दर्शकों ने छऊ नृत्य का आनंद उठाया। इधर भक्ताओं ने धार्मिक अनुष्ठान कालिका घट (कामना घट) का रश्म पूरा किया। धार्मिक रीति रिवाज से परिपूर्ण इस उत्सव में लोग परंपरा संस्कृति संवर्धन संरक्षण के प्रति जागरूक दिखे।



Comments
Post a Comment