सरहुल


 *सरायकेला: पदमपुर में आस्था उल्लास के साथ मनाया गया सरहुल, पूजे गये प्रकृति के रक्षक*

 *दीपक कुमार दारोघा*

सरायकेला: सरहुल पर्व के शुभ अवसर पर ईटाकुदर पंचायत के पदमपुर गांव में पूजे गये प्रकृति के रक्षक।

साल (वृक्ष) डाल के नीचे आदिवासी परंपरा अनुसार ग्रामीण पूजा रश्म पूरा किया। मान्यता है कि साल वृक्ष प्रकृति के रक्षक एवं समृद्धि का प्रतीक है। और प्रकृति के आराध्य देवों का निवास स्थान भी माना जाता है। ग्रामीणों ने प्रकृति के सर्वोच्च देवता सूर्य देव,धरती माता, गांव के देवता, पहाड़ों के देवता, जल के देवता की पूजा अर्चना की। उपासना पूर्वक घर के पूर्वजों को भी याद किया। पारंपरिक प्रार्थना की एवं आराध्य देवों पर आस्था जताया। अनुष्ठान के बाद साल वृक्ष (सखुआ) का फूल धारण किए महिला पुरुष बच्चों ने मादर के थाप पर थिरकते हुए खुशी का इजहार किया। बताते चलें कि प्रकृति के प्रति भक्ति आस्था उल्लास के इस पर्व में झारखंड के राजकीय वृक्ष साल का महत्व भी प्रकाश में आया। गांव के धनपति सरदार ने बताया कि धरती माता और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेने का भी दिन है। आस्था उल्लास के साथ मनाया गया सरहुल।

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