गणतंत्र दिवस पर विशेष

 

*हम भारतीयों के लिए कहानी संविधान की*

*दीपक कुमार दारोघा*

हम,भारत के लोग विविधताओं पर गर्व करते हैं। विभिन्न भाषा, शैली, रहन-सहन के बावजूद लोगों के भावनाओं के अनुकूल बनी भारत गणतांत्रिक देश के संविधान का प्रथम प्रकाशन एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाता है।

यह स्वतंत्र राष्ट्र के लिए भारतीय द्वारा बनी दुनिया की सबसे लंबा लिखित संविधान है। हस्त लिखित इस संविधान का प्रथम प्रकाशन उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। दून स्थित सर्वे आफ इंडिया की प्रेस में छपी गई थी। एक हजार प्रतियां छपी गयी थी। संविधान के एक प्रति आज भी दून के सर्वे ऑफ़ इंडिया म्यूजियम में तथा हस्तलिखित मूल प्रति दिल्ली नेशनल म्यूजियम में है।

संविधान अंगीकृत के समय 395 अनुच्छेद 8 अनुसूचियां थी। वर्तमान 470 अनुच्छेद 12 अनुसूचियां हैं। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा संविधान को अंगीकृत किया गया। और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।

संविधान सभा की 1946 में गठन हुई। इसमें 389 सदस्य थे। 11 दिसंबर 1946 को डॉ राजेंद्र प्रसाद स्थाई चेयरमैन चुने गए। देश विभाजन के बाद सदस्यों की संख्या घटकर 299 थी। और इस हस्तलिखित संविधान पर 24 जनवरी 1950 को 284 संसद सदस्यों ने साइन की। संविधान का मूल आधार भारत सरकार अधिनियम 1935 को माना जाता है। भारत में पहली बार संविधान संशोधन 1950 में हुई।

इसके तहत सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की उन्नति के लिए उपबंध बनाने हेतु राज्यों को शक्तियां दी गई थी। विविधता के बावजूद विश्व में भारत अपना सामर्थ्य दिखा रहा है। देश अब 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।

भारत की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बापू के सिद्धांत पर चलकर संविधान सभा के सदस्यों ने बहुत महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। भारत का संविधान 7 दशक से प्रकाश स्तंभ बनाकर हमें मार्ग दिखाता रहा है। 

भारत के संविधान निर्माता महापुरुषों में डॉ राजेंद्र प्रसाद, डॉ बी.आर अंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, इतना ही नहीं नारी शक्ति का भी योगदान कम नहीं था। हंसा मेहता,दक्षयानी वेलायुधन जैसी विदुषियों ने भी भारत के संविधान को सशक्त करने में भूमिका निभाई थी।

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